न्यू सीरिज न्यूज (Rajasthan News) : राजस्थान के गांवों में नया टैक्स मॉडल लागू करने की योजना पर चर्चाएं तेज होने लगी हैं। इसके तहत पंचायतें हर घर से 1200 रुपए सालाना टैक्स वसूलेंगी। इससे ग्राम पंचायतों की आय बढ़ेगी और आर्थिक रूप से अधिक सक्षम होंगी। हालांकि पहले सरकार की तरफ से गाइडलाइन आएंगी, उसके बाद ही टैक्स की राशि निर्धारित होंगी लेकिन कहा जा रहा है कि न्यूनतम 1200 रुपए प्रति परिवार से वसूलने की सरकार की तैयारी है।
दरअसल राजस्थान (Rajasthan News) के ग्रामीण स्थानीय निकायों की सबसे बड़ी चुनौती उनकी सीमित आय मानी जाती है। ज्यादातर ग्राम पंचायतें गांव में विकास कार्य के लिए प्रदेश सरकार व केंद्र सरकार पर ही निर्भर रहती है। विभिन्न योजनाओं के तहत कभी सेंटर से तो कभी राज्य सरकार से फंड व ग्रांट मिलती हैं तो गांव में गलियां पक्की होती है। तालाबों की चारदीवारी से लेकर बाउंड्रीवाल, पुलिया समेत गांवों में होने वाले कार्य सरकार द्वारा जारी ग्रांट पर ही निर्भर होते हैं।

कुछ गांवों में पंचायती जमीन से पट्टा की राशि मिलती है तो कुछ और संसाधन होते हैं, जिनसे कमाई होती है। इससे गांव में पेयजल, स्ट्रीट लाइट समेत दूसरी बुनियादी सुविधाएं जुटाई जाती हैं। ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सरकार इस नई व्यवस्था को लागू करने की योजना बना रही है। इससे 16वें वित्त आयोग की व्यापक दिशा के अनुरूप भी माना जा रहा है। हालांकि अभी फाइनल फैसला सरकार का ही रहेगा।
Rajasthan News : पंचायतें इन सेवाओं के बदले वसूलेंगी टैक्स
- सफाई और कचरा प्रबंधन का टैक्स
- स्ट्रीट लाइटों का रख रखाव के नाम का टैक्स
- आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों से संबंधित स्थानीय कर
- पेयजल आपूर्ति के नाम से यूजर चार्ज का टैक्स
- गांवों में आयोजित होने वाले मेले, हाट बाजार समेत दूसरे सावर्जनिक सुविधाओं वाले टैक्स
- पंचायत क्षेत्र में उपलब्ध कराई जाने वाली कुछ विशेष सेवाओं के लिए अलग-अलग फीस
Rajasthan में अलवर के सीईओ ने कहा गाइडलाइन का इंतजार
राजस्थान में ग्राम पंचायतों द्वारा टैक्स लागू करने की व्यवस्था के मामले में अलवर के जिला परिषद के सीईओ सालुखे गौरव रविंद्र का कहना है कि सरकार की डिटेल गाइडलाइन का इंतजार कर रहे हैं। जैसे ही गाइडलाइन आएंगी, उसी के अनुसार तय किया जाएगा कि ग्राम पंचायत द्वारा किस तरह का और कितने रुपए वार्षिक टैक्स लागू किया जाएगा। हालांकि लोगों का कहना ये है कि इससे पंचायत को वित्तीय हानि हो सकती है, क्योंकि उसके बाद सरकार द्वारा कम ग्रांट आएगी और पंचायतें केवल इसी टैक्स पर निर्भर रह जाएंगी।
ग्रामीणों पर भी पड़ेगा आर्थिक बोझ
राजस्थान सरकार (Rajasthan Govt. News) की इस नई व्यवस्था का एनालिसिस किया जाए तो इससे ग्रामीणों पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। इस मामले में प्रशासन यह तर्क दे रहा है कि नाम मात्र टैक्स के बदले ग्रामीणों को बेहतर सफाई व्यवस्था मिलेगी। पेयजल व्यवस्था मजबूत होगी तो स्ट्रीट लाइटें सही और दुरुस्त रहेंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कर वसूली कितनी पारदर्शी हो, धन का उपयोग किस प्रकार किया जाए और पंचायतें जनता के प्रति कितनी जवाबदेह रहें।
वहीं दूसरी तरफ 16वें वित्त आयोग ने 2026-31 की अवधि के लिए ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों को बड़े पैमाने पर ग्रांट देने की सिफारिश की है। यदि पंचायतें अपने स्तर पर भी आय बढ़ाती हैं, तो वे सरकारी ग्रांट पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय स्थानीय विकास कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित कर सकेंगी।

