Video viral Ambala : राजकीय आइटीआइ अंबाला शहर में आयोजित शिल्प अनुदेशक प्रशिक्षण योजना (सीआइटीएस) की प्रैक्टिकल परीक्षा विवादों के घेरे में आ गईं है। परीक्षा में शामिल विद्यार्थियों ने आरोप लगाया है कि उनसे प्रैक्टिकल परीक्षा के दौरान 10-10 हजार रुपये की मांग की गई।
विरोध की आशंका को देखते हुए उनसे पहले से ही एक खाली पेज पर हस्ताक्षर भी करवा लिए गए। हस्ताक्षर नहीं करने पर फेल करने की धमकी दी गई और गाली-गलौज तक किया गया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। परीक्षा वीरवार को हुई थी, 300 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया था। वीडियो आइटीआइ के निदेशक के पास भी पहुंची है जिन्होंने इस मामले में उच्चस्तरीय जांच का आश्वासन दिया है।
आइटीआइ के गेट के बाहर खड़े होकर बनाया गया Video viral
विद्यार्थियों ने आइटीआइ के मुख्य गेट के बाहर खड़े होकर वीडियो रिकार्ड किया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा से पहले उनसे रुपये मांगे गए। उनका यह भी दावा है कि बाद में उनसे ऐसे दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराए गए, जिसमें लिखा था कि परीक्षा के दौरान किसी भी परीक्षक ने उनसे कोई धनराशि नहीं मांगी और न ही उनके साथ किसी प्रकार का अनुचित व्यवहार किया गया।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस दस्तावेज में कई विद्यार्थियों के नाम, मोबाइल नंबर और हस्ताक्षर दर्ज हैं। इसमें लिखा गया है कि संबंधित परीक्षा के दौरान नियुक्त एग्जामिनर ने किसी भी प्रकार की धनराशि की मांग नहीं की तथा किसी तरह की धमकी या अभद्र व्यवहार नहीं किया। अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि विद्यार्थियों के आरोप सही हैं तो यह दस्तावेज कब और किन परिस्थितियों में तैयार कराया गया।
अधिकाशं विद्यार्थी बलाना एसआर प्राइवेट आइटीओटी से
परीक्षा में शामिल अधिकांश विद्यार्थी एसआर प्राइवेट आइटीओटी, बलाना से थे। अब पूरे मामले की जांच से ही यह पता चल सकेगा कि इनमें कितनी सच्चाई है। सबसे अहम बिंदु यह होगा कि क्या वास्तव में विद्यार्थियों से धनराशि की मांग की गई थी, कितने अभ्यर्थियों से कथित वसूली हुई और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो इसमें किन कर्मचारियों या अधिकारियों की भूमिका रही।
पत्र में जो लेखनी है वह विद्यार्थियों की नहीं हो सकती
वायरल दस्तावेज ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस भाषा और शैली में प्रमाण-पत्र लिखा गया है, उसे देखकर यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या ऐसा प्रारूप स्वयं विद्यार्थियों ने तैयार किया होगा या किसी अन्य ने लिखकर उनसे हस्ताक्षर कराए।
हस्तलेखन और हस्ताक्षरों की जांच से भी कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। सीआइटीएस (शिल्प अनुदेशक प्रशिक्षण योजना) आइटीआइ में प्रशिक्षक बनने के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण है। इसके तहत प्रैक्टिकल और कंप्यूटर आधारित परीक्षाएं सरकारी आइटीआइ केंद्रों पर आयोजित की जाती हैं।
प्रिंसिपल ने नहीं दिया प्रत्युत्तर
मामले में राजकीय आइटीआइ अंबाला शहर के प्रिंसिपल दिनेश राणा से संपर्क किया गया तो उनका मोबाइल नंबर नोट रिचेबल आया। वाट्सएप पर संपर्क किया गया तो उन्होंने बार-बार फोन करने पर काट दिया। उन्हें मैसेज भी छोड़ा गया लेकिन उसका जवाब नहीं दिया।
आईटीआई हरियाणा के निदेशक सतिंद्र दूहन ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। इस मामले की निश्चित तौर पर उच्चस्तरीय जांच करवाई जाएगी। यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो निश्चित तौर पर कार्रवाई की जाएगी।
Video viral : सोशल मीडिया पर आईटीआई का यह वीडियो हुआ वायरल

