न्यू सीरिज न्यूज
Haryana Monsoon Update : मानसून का इंतजार कर रहे हरियाणा के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। बुधवार रात प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश हुई। वहीं मौसम विभाग ने 3 जुलाई यानी शुक्रवार को हरियाणा के अधिकतर क्षेत्रों में बारिश की संभावना जताई है। इससे जहां लोगों को उमस भरी भीषण गर्मी से राहत मिली है, वहीं धान की रोपाई की तैयारी कर रहे किसानों को भी उम्मीद बनी है।
हालांकि हरियाणा में मानसून की एंट्री सामान्यतौर पर जून महीने के अंतिम सप्ताह तक हो जाती है, लेकिन इस बार कुछ देर से मानसून की बारिश हुई है। इसके परिणाम स्वरूप बुधवार रात और वीरवार सुबह मध्य हरियाणा के जींद – फतेहाबाद के साथ कई जिलों में बारिश दर्ज की गई है। इस दौरान रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, गुरुग्राम के साथ हिसार, कुरुक्षेत्र, पानीपत, सोनीपत, करनाल में बारिश हुई।
Haryana Monsoon Update : 3 जुलाई को भारी बारिश
इसके साथ ही मौसम विभाग ने 3 जुलाई को हरियाणा के अधिकतर क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग का कहना है कि 3 जुलाई को पंचकूला, अंबाला, कैथल, कुरुक्षेत्र, करनाल, यमुनानगर में भारी बारिश हो सकती है। (Haryana Monsoon Update)
इसके अलावा जींद, हिसार, सिरसा, पानीपत, सोनीपत, रोहतक झज्जर, भिवानी चरखीदादरी, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, गुरुग्राम, नूह, पलवल व फरीदाबाद में हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश हो सकती है। हालांकि हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डा. एमएल खीचड़ के अनुसार 4 जुलाई तक प्रदेश में बारिश होती रहेगी।
देरी से पहुंचा मानसून
हरियाणा में मानसून के पहुंचने का समय जून का अंतिम सप्ताह होता है। आमतौर पर 29 जून तक हरियाणा में मानसून की दस्तक हो जाती है। इस हिसाब से देखा जाए तो हरियाणा में मानसून करीब 3 दिन की देरी से पहुंचा है। (Haryana Monsoon Update) हालांकि अगले 1-2 दिन में मानसून पूरे हरियाणा को कवर कर लेगा। हालांकि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने 7 जुलाई तक हरियाणा में मानसून की संभावना जताई है। ऐसे में इसको प्री मानसून की बारिश कहा जा सकता है।
सामान्य से कम बारिश की संभावना
हालांकि जून महीने की बात की जाए तो हरियाणा में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई थी। वहीं अब संभावना है कि मानसून मौसम में हरियाणा में सामान्य करीब 10 से 12 प्रतिशत कम बारिश होगी। मौसम विभाग का अनुमान है कि इस बार 88 प्रतिशत बारिश रहेगी। हरियाणा में मानसून के दौरान औसत 440 एमएम बारिश का अनुमान रहता है।

पिछले साल हुई थी सामान्य से अधिक बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों को देखें तो पिछले साल यानी 2025 में सामान्य से करीब 34 प्रतिशत बारिश अधिक हुई थी। हरियाणा में मानसून सीजन के दौरान वर्ष 2025 में कुल 568 से अधिक बारिश दर्ज की गई थी। वहीं इस बार किसानों को कम बारिश की संभावना का डर सता रहा है। हालांकि 2021 के दौरान 571.5 एमएम बारिश हुई थी। सबसे कम बारिश की बात की जाए तो वर्ष 2014 में महज 200 एमएम हुई थी।
धान की रोपाई पकड़ेगी रफ्तार
हरियाणा में अधिकतर किसान धान की फसल के लिए बारिश पर ही निर्भर रहते हैं। ऐसे में अब बारिश शुरू हुई और मौसम विभाग ने आने वाले कुछ दिन तक बारिश की संभावना जताई है तो धान की रोपाई का काम गति पड़ेगा। बेशक इस बार धान की सीधी बिजाई भी बड़े क्षेत्र में हुई है, लेकिन फिर भी रोपाई करने वाले किसानों की संख्या अधिक है।
यह भी पढ़ें : NHRC की सख्त टिप्पणी : जींद सिविल अस्पताल में गर्म वार्ड, खराब RO और अल्ट्रासाउंड सुविधा पर उठे सवाल
बारिश के मौसम में फसल प्रबंधन
वरिष्ठ कृषि विशेषज्ञ डा. सुभाष चंद्र के अनुसार इस बार बारिश कम होने की संभावना है, ऐसे में किसान धान को छोड़ कर बाजरे की फसल ले सकते हैं। इसके लिए हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा घोषित की गई किस्मों का चयन करें। इसमें एचएचबी-67 संशोधित, एचएचबी 146, एचएचबी 197, एचएचबी 216, एचएचबी 223, 226, 234, 226, एचसी 20, एचएचबी 50, 60 व एचएचबी 94 किस्म प्रमुख हैं।
हालांकि किसान अपने क्षेत्र के अनुसार चयन के लिए स्थानीय कृषि अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैँ। अपने क्षेत्र में उपयुक्त बारिश होने पर बाजरे की बिजाई की जा सकती है। खेत की नमी के हिसाब से एक एकड़ में 1.2 से 2 किलोग्राम बीज पर्याप्त रहता है। इसी प्रकार यदि किसान बारिश का इंतजार कर रहे थे तो अब ग्वार की बिजाई भी कर सकते हैं। इसके लिए हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार द्वारा एचजी 75, एचजी 365, एचजी 563, एचजी 780 और एचजी 2-20 का चुनाव करें।
इस मौसम में कपास की फसल की भी उपयुक्त देखभाल की जरूरत है। क्योंकि अब बारिश के साथ खरपतवार भी तेजी से बढ़ेगा, ऐसे में इसके नियंत्रण के लिए तैयारी रखें। यह मौसम गन्ने की बढ़वार के लिए काफी महत्वपूर्ण है, ऐेसे में गन्ने के खेत में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करें।

