Savita Punia success storySavita Punia success story

न्यू सीरिज न्यूज, खेल डेस्क 

success story Savita Punia : भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान पद्मश्री सम्मान से अलंकृत सविता पूनिया का हिसार के हॉकी मैदान में जोरदार स्वागत हुआ। जहां पर सविता पूनिया अपने अवार्ड के साथ पहुंची और इस मैदान, कोच से जुड़ी हुई पुरानी यादों को याद करके भावुक हो गई।

हॉकी खिलाड़ी सविता पूनिया ने खुलासा किया कि एक टाइम ऐसा भी था कि उसके पास हॉकी कीपर की कीट तक खरीदने के लिए रुपये नहीं थे, लेकिन उनके कोच ने उनको टेलेंट को देखकर अपने रुपये से कीट खरीदकर दी और अपने कोच की दिशा निर्देश में भारतीय हॉकी टीम में शामिल हुई। ग्राउंड के खिलाड़ियों, कोचों, जिला खेल अधिकारी और खेल प्रेमियों ने फूल-मालाओं और तालियों की गूंज के बीच उनका अभिनंदन किया।

पद्मश्री अवॉर्ड को Savita Punia ने अपने गुरु कोच आजाद सिंह मलिक को दया

हिसार में आयोजित सम्मान समारोह का सबसे भावुक पल तब आया, जब सविता ने अपना पद्मश्री अवॉर्ड अपने गुरु कोच आजाद सिंह मलिक के हाथों में थमाते हुए कहा, ‘इस सम्मान के असली हकदार मेरे कोच हैं। अगर उन्होंने मेरा साथ नहीं दिया होता तो मैं यहां तक कभी नहीं पहुंच पाती। सविता के यह शब्द सुनते कोच आजाद सिंह मलिक की ही आंखें नम हो गईं। अपने गुरु को भावुक होता देख सविता भी अपने आंसू नहीं रोक सकी।

Savita Punia को कोच ने 18 हजार में खरीदकर दी थी कीट

मैदान पर मौजूद हर व्यक्ति ने तालियों से दोनों का सम्मान किया। सविता पूनिया Savita Punia ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि वर्ष 2005 में जब वह सिरसा स्थित अपने गांव से हिसार हॉकी की प्रैक्टिस करने आई थीं, तब उनके पास गोलकीपर की किट खरीदने तक के पैसे नहीं थे।

उस समय कोच आजाद सिंह मलिक ने बिना किसी हिचकिचाहट के करीब 18 हजार रुपए की गोलकीपर किट अपने स्तर पर खरीदकर उन्हें दी। यही वह क्षण था, जिसने उनके हॉकी करियर को नई दिशा दी। उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में वह अभ्यास के दौरान अक्सर पीछे रह जाती थीं। कई बार उनका खेलने का मन भी नहीं करता था और वह मानसिक दबाव महसूस करती थीं।

ऐसे समय में कोच ने न केवल उनका हौसला बढ़ाया, बल्कि लगातार टीम में मौका देकर उनका आत्मविश्वास मजबूत किया। सविता ने कहा कि यदि उस समय कोव ने उन पर भरोसा नहीं किया होता तो शायद वह कभी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक नहीं पहुंच पातीं। तक सविता ने वर्ष 2005 से 2015 हिंसार के एस्ट्रोटर्फ मैदान पर रहकर हॉकी का अभ्यास किया। मूल रूप से सिरसा जिले की रहने वाली सविता पुलिस लाइन रहकर अपनी तैयारियां करती थीं।

Savita Punia success story
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Savita Punia की हॉकी खेल में उपलब्धियां

2013-एशिया कप कांस्य,  2014- एशियाई खेल, इंचियोन कांस्य,  2016-एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी, सिंगापुर स्वर्ण 2017-एशिया कप, जापान स्वर्ण 2018-एशियाई खेल, जकार्ता स्जत 2018-एशियाई 2019-एफआईएच सीरीज फाइनल, हिरोशिमा स्वर्ण 2021-एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी, चैंपियंस ट्रॉफी, डोंगाहे रजत डोंगहे कांस्य 2022-एफआईएच नेशंस कप, स्पेन स्वर्ण 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स, बर्मिंघम कांस्य 2023-एशियाई खेल, हांगझोउ कांस्य 2023-एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी, रांची स्वर्ण

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By Joginder Duhan

जोगेंद्र दूहन पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। पिछले आठ साल मैंने देश के प्रमुख समाचार पत्र दैनिक जागरण में बतौर सीनियर रिपोर्टर के पद पर अपनी सेवाएं अखबार व डिजिटल मीडिया पर दी। इससे पहले मैंने अमर उजाला, दैनिक हरिभूमि, दैनिक आज समाज जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में अपनी सेवाएं दे चुका हूं। अपनी पत्रकारिता जीवन में विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर रिपोर्टिंग एवं लेखन का व्यापक अनुभव अर्जित किया है।