न्यू सीरिज न्यूज, चंडीगढ़
Pharmaceutical Research PGI Chandigarh : शुगर और मोटापा कम करने वाली नई जनरेशन की दवाओं का साइड इफेक्ट सामने आ रही है। इन दवाओं के प्रयोग से आनंद लेने वाली वस्तुओं से लोगों का मोहभंग हो रहा है। नई जनरेशन की दवाएं वजन घटाने और शुगर कंट्रोल करने में बेहद असरदार हैं।
लेकिन डॉक्टरों ने अब इन दवाओं के एक बिल्कुल नए और कम चर्चित साइड इफेक्ट को लेकर अलर्ट किया है, जिसे ‘हेडोनिक इफेक्ट’ कहते हैं। पीजीआई चंडीगढ़ के एंडोक्रिनोलॉजी विभाग के हेड प्रो. संजय बडाडा के मुताबिक, यह दवा दिमाग के उस हिस्से पर असर डालती है जो हमें आनंद और रिवॉर्ड का अहसास कराता है। हर 100 में से करीब 10 से 15 मरीजों में यह बदलाव या रुचि की कमी देखी जा रही है।
पीजीआई की ओपीडी में आने वाले कई मरीजों के फीडबैक से पता चला है कि यह दवा लेने के बाद उनका शराब पीने, धूम्रपान करने और मीठा खाने का मन कम हो गया है। उन्हें अब इन चीजों में पहले जैसा मजा नहीं आता।
शुरुआती स्टडीज में यह भी सामने आया है कि कुछ मरीजों में यौन इच्छा कम हो सकती है। हालांकि, एक्सपर्ट्स ने साफ किया है कि यह केवल रुचि की कमी है, शारीरिक क्षमता की नहीं।
पीजीआई चंडीगढ़ के एंडोक्रिनोलॉजी एचओडी डॉ. संजय बडाडा ने दवा रिसर्च Pharmaceutical Research के बारे में बताया
1. क्वालिटी ऑफ लाइफ प्रभावित हो सकती है
अगर किसी मरीज को जिंदगी की हर आनंददायक चीज में रुचि बिल्कुल खत्म होने लगे, तो उसकी ‘क्वालिटी ऑफ लाइफ’ प्रभावित हो सकती है। इसलिए दवा शुरू करने से पहले इसकी जानकारी होना जरूरी है।
2. एहतियातः स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते रहें: इन दवाओं से वजन घटने के साथ-साथ शरीर की मांसपेशियां भी कमजोर हो सकती हैं। इससे बचने के लिए डॉक्टरों की सलाह है कि दवा के साथ-साथ नियमित व्यायाम और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (वजन उठाने वाली एक्सरसाइज) जरूर करें।
3. फायदे नुकसान से कहीं ज्यादा बड़े
इन दवाओं के फायदे जैसे- वजन कम होना, शुगर कंट्रोल, हार्ट और किडनी की सुरक्षा… इसके नुकसानों से कहीं ज्यादा बड़े हैं। इसलिए डॉक्टर की देखरेख में नियमित फॉलोअप के साथ ही यह दवा ले सकते हैं।
4. यह साइड इफेक्ट सहन करने योग्य डॉक्टरों के अनुसार यह साइड इफेक्ट ‘टॉलरेबल’ यानी सहन करने योग्य है, इससे घबराने की जरूरत नहीं है। शुरुआत में दवा लेने पर उल्टी, मतली या पेट खराब होने जैसी दिक्कतें होती हैं। यह एक सामान्य प्रभाव है जो हर मरीज में नहीं दिखता।

