न्यू सीरिज न्यूज, रोहतक
Success Story Rohtak : महिलाओं को रसोई तक ही सीमित माना जाता है, लेकिन अगर महिला कुछ करने की ठान लेती है तो आसनी से मुकाम बना लेती है। ऐसी की एक महिला रोहतक जिले के गांव कटवाड़ा की है।
दसवीं तक पढ़ी गृहिणी सुषमा ने खुद का कारोबार शुरू करके बिजनेस में अलग पहचान बनाई है। सुषमा ने मत्स्य पालक करके इसमें सफलता हासिल की है। अब वह घरेलू जिम्मेदारियों के अलावा बिजनेस के क्षेत्र में अलग सफलता हासिल की है। सुषमा की सफलता की कहानी को अब प्रशासन दूसरे लोगों को प्रेरणास्त्रोत के तौर पर पेश कर रही है।
सुषमा की Success Story
रोहतक के डीसी सचिन गुप्ता ने बताया कि रोहतक जिला के गांव कटवाड़ा की गृहिणी सुषमा ने मत्स्य पालक करके अपनी सफलता की कहानी प्रस्तुत की है। 31 वर्षीय सुषमा व उसका पति सोमपाल दसवीं कक्षा तक ही शिक्षित है। सुषमा ने परंपरागत खेती की बजाए वर्ष 2022 में अपने गांव कटवाड़ा में दो एकड़ में मछली पालन शुरू किया।
जहां पर शुरुआत में उसने 12 हजार मछलियों का बीच दो एकड़ में बने हुए तालाब में डाला। इसके बाद वैज्ञानिकों की सलाह पर अपना कारोबार को आगे बढ़ाती गई। इसी दौरान सुषमा ने आइसीएआर – सीआईफई / एआरटीआई हिसार से मत्स्य पालक में तकनीकी प्रशिक्षण लिया। जहां पर उनको मत्स्य पालक की तकनीकों और तालाब प्रबंधन की जानकारी मिली। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत लगभग पांच लाख रुपये की सब्सिडी का लाभ भी प्राप्त किया।

सुषमा ने 8 मीट्रिक टन मछली उत्पादन करके हासिल की सफलता (Success Story)
डीसी सचिन गुप्ता ने बताया कि सुषमा ने एक बार मत्स्य पालक में कदम रखते हुए नियमित मार्गदर्शन और वैज्ञानिक तरीके से तालाब प्रबंधन अपनाने के कारण सुषमा का व्यवसाय निरंतर प्रगति करता गया। वर्तमान में वह अपने तालाब से प्रतिवर्ष लगभग आठ मीट्रिक टन मछली उत्पादन कर रही हैं।
मत्स्य पालक के माध्यम से लगभग 20 लाख रुपये का वार्षिक कारोबार कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। सुषमा अपनी सफलता का श्रेय (Success Story) अपने पति, जिला मत्स्य अधिकारी तथा मत्स्य पालन विभाग के विशेषज्ञों को देती हैं। उनका कहना है कि परिवार के सहयोग और विभागीय मार्गदर्शन ने उन्हें इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास प्रदान किया।
सुषमा ने बताया कि उनके पति ने उन्हें मत्स्य पालन के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया, जबकि विभागीय प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता ने उन्हें व्यवसाय को सफलतापूर्वक संचालित करने की क्षमता प्रदान की। आज वे न केवल स्वयं अच्छी आय अर्जित कर रही हैं बल्कि अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा कि सुषमा की सफलता (Success Story) यह साबित करती है कि यदि महिलाएं सरकारी योजनाओं, तकनीकी प्रशिक्षण तथा आधुनिक कृषि एवं मत्स्य पालन तकनीकों का लाभ उठाएं तो वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ समाज में अपनी अलग पहचान भी स्थापित कर सकती हैं।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ उठाकर बनें आत्मनिर्भर
उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना देश में ब्लू रिवोल्यूशन को नई गति प्रदान कर रही है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाएं।
योजना के माध्यम से मछली उत्पादन बढ़ाने, मछुआरों की आय में वृद्धि करने तथा रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत आधुनिक मत्स्य पालन, कोल्ड स्टोरेज, मछली परिवहन, प्रसंस्करण तथा विपणन सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। साथ ही मछुआरों को आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
जिला मत्स्य अधिकारी आशा हुड्डा ने बताया कि सरकार का उद्देश्य किसानों और बेरोजगार युवाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है। योजना के तहत मीठे एवं खारे पानी के तालाबों में मत्स्य पालन के लिए अनुदान भी उपलब्ध कराया जाता है।

