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Reduce Spiciness : सामान्यतौर पर जब भी घरों में सब्जी या चटनी बनाई जाती है, कई बार उसमें अधिक मिर्च डल जाती हैं। या फिर जो मिर्च हम प्रयोग कर रहे हैं, उसके तीखेपन का पता नहीं होता। ऐसे में जब बनाई बनाई सब्जी या चटनी को फैंक दिया जाता है। लेकिन इसकी जरूरत नहीं है।
यदि सब्जी या चटनी में अधिक तीखापन हो जाता है तो घर ही इसको ठीक किया जा सकता है। साथ ही यह उपाय ऐसे होते हैं, जिससे खाने में मिर्च तो कम हो ही जाएंगी, साथ में स्वाद भी कई गुना तक बढ़ जाएगा। अधिक तीखा खाना स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। इससे रक्तचाप संबंधित समस्या भी आ सकती हैं। इसके लिए जरूरी है सही जानकारी और इसको प्रयोग करने की विधि। आईए आपको आज के इस लेख में इस बारे में बताते हैं।
Reduce Spiciness: क्यों होती है मिर्च तीखी
मिर्च के प्रभाव को कम करने से पहले हमें मिर्च में तीखेपन का कारण जान लेना चाहिए। दरअसल मिर्च में तीखापन कैप्सासिन सक्रिय रासायनिक यौगिक के कारण होता है। मिर्च के तीखेपन काे स्कोविल स्केल नामक उपकरण से मापा जाता है। यानी मिर्च में जितना तीखापन होगा, उसे उसी अनुसार स्कोविल हीट यूनिट होगी।
तीखेपन की बात की जाए तो तीखेपन की बात की जाए तो पेपर एक्स का नाम सबसे ऊपर आता है। हालांकि भारत के असम राज्य में पाई जाने वाली भूत जोलोकिया या नागा मिर्च भी विश्व की सबसे तीखी मिर्चों में शामिल है। 2007 में इस मिर्च को अपने तीखेपन के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में भी जगह मिल चुकी है। आयुर्वेद की बात की जाए इसमें भोजन में 6 रसों का मिश्रण बताया गया है। इसमें मधुर, अम्ल, लवण, कटु, तिक्त, कषाय रस शामिल हैं।
हरियाणा राजस्थान में प्रसिद्ध है मिर्च चटनी और घी
मिर्च का प्रभाव कम करने के लिए हरियाणा और राजस्थान में प्राचीन समय से ही घी का प्रयोग होता आया है। यहां पर लाल मिर्च की चटनी और रोटी को घी के साथ खाने की चलन है। दूसरे राज्यों से भी लोग हरियाणा राजस्थान जाते हैं तो यहां स्थानीय भोजन के रूप में लाल मिर्च की चटनी और रोट को घी के साथ लेते हैं। यह खाना विश्व भर में प्रसिद्ध है। इसमें घी मिलने के बाद सिर्फ लाल मिर्च से बनी चटनी भी असानी से खाई जा सकती है।
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आयुर्वेद के अनुसार घी है मिर्च की काट
जानेमाने आयुर्वेदार्च डा. ओमप्रकाश के अनुसार मिर्च की काट मुख्य रूप से घी है। अन्य पदार्थ मिलाकर मिर्च के तीखेपन को तो कम कर सकते हैं, लेकिन शरीर पर उसका प्रभाव कम नहीं होगा। क्योंकि इससे मिर्च सिर्फ खाने में कम तीखी लगेगी। ऐसे में यदि अधिक मिर्च हो गई हैं तो सब्जी या चटनी में घी का प्रयोग करें। ध्यान रहे, यह देसी और दूध से बना हुआ घी होना चाहिए। इससे जहां मिर्च का असर कम होगा, वहीं खाने का स्वाद भी बढ़ जाएगा।
अन्य डेयरी उत्पाद भी प्रभावशाली
घी के अलावा अन्य उत्पाद भी मिर्च का प्रभाव कम करने में प्रभावशाली होते हैं। इसमें मक्ख्न, दही, लस्सी या मलाई का प्रयोग किया जा सकता है। फ्रैश क्रीम भी सब्जी में मिर्च का असर कम कर देती है। हालांकि क्रीम मिलाकर सब्जी को कुछ समय के लिए पकाया जाना चाहिए। इससे क्रीम का कच्चापन चला जाए।
मीठा भी एक विकल्प
सब्जी में अधिक तीखापन होने के कारण इसमें कुछ मीठा मिलाया जा सकता है। इसके लिए गुड़ का प्रयोग सबसे अधिक प्रभावशाली रहता है। गुड़ मिलने के कारण साथ में मीठापन होने के कारण तीखापन संतुलित हो जाएगा। इससे आसानी से सब्जी खाई जा सकती है और यह नई वैरायटी भी बन जाती है।
आटा, बेसन या मैदा मिलाकर
सब्जी में अधिक मिर्च होने पर इसमें गेहूं का आटा, बेसन या मैदा मिला जा सकता है। इसको देशी भाषा में आलन कहा जाता है। यह आलन लगने से जहां सब्जी का प्रारूप कुछ गाड़ा और आकर्षक हो जाएगा, वहीं इससे मिर्च का प्रभाव भी कम हो जाता है। ऐसे में 3 से 4 चम्मच मैदा या बेसन लेकर इसको थोड़े पानी में अच्छी प्रकार से घोल लें। इसके बाद इसको सब्जी में मिला कर पका लें।

