स्वास्थ्य डेस्क, न्यू सीरिज न्यूज, जींद : Satyanashi : हमारे आसपास उगने वाले घास फूस में बेशकीमती और चमत्कारी जड़ी बूटियां छिपी हुई हैं। जरूरत है इसको पहचानने की। आज हम आपको ऐसे ही एक पौधे के बारे में बता रहे हैं, जिसकी खूबियां जानकर आप भी चौंक जाएंगे। इस पौधे के औषधीय गुण बुढ़ाने में भी जवानी लौटाने की शक्ति रखते हैं। इस पौधे का नाम है सत्यानाशी।
आयुर्वेद के अनुसार इस पौधे में बहुत ही विशेष गुण होते हैं। देखने में झाड़नुमा और कंटिला यह पौधा स्वास्थ्य के लिए संजीवन बूटी से कम नहीं है। विशेषकर मरुस्थलीय और बरानी क्षेत्रों में यह पौधा सामान्यतौर पर मिल जाता है। आइए आपको इस खास पौधे के गुणाें और पहचान के बारे में बताते हैं। 7 दिन तक इस पौध का सेवन करने से शरीर में घोड़े जैसी फूर्ति और ताकत आती है।
Satyanashi : सत्यानाशी की पहचान
यह पौधा बहुत ही जबरदस्त और बेजोड़ प्रभाव देने वाली जड़ी बूटी के रूप में जाना जाता है। इस पौधे की विशेषता यह है कि जो इसके औषधीय गुणों को लेता है, वह बुढ़ापे में भी जवान हो जाता है। यह पौधा झाड़नुमा और कंटिला होता है। इस पौधे की पत्तियां और तना हरे रंग की होती हैं और इस पर बहुत ही आकर्षक सुनहरे फूल आते हैं। इस पौधे की जड़ से लेकर पत्तियां, फूल और फल सभी लाजवाब औषधी के रूप में काम करते हैं।
शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी
आयुर्वेद में इस पौधे के काफी गुण वर्णित हैं। इसके गुण हमारे शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाते हैं। यूं तो पौधे का रस से लेकर फल, फूल सभी कुछ औषधीय गुणों से भरपूर है, लेकिन मुख्य रूप से इसकी जड़ों का प्रयोग होता है।
बुढापे पर करता है वार
सत्यानशाी का प्रभाव बढ़ती उम्र में भी शरीर को बलिष्ठ और ताकतवर रखता है। क्योंकि आयुर्वेद में भी इस गुणकारी पौधे का वर्णन एक विशेष रसायन के रूप में मिलता है। आयुर्वेद चिकत्सक डा. मनोज देव के अनुसार इस पौधे के राशायनिक गुण शरीर और मन को स्वस्थ तो रखते हैं, साथ ही यह बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से लाभदायक होता है। क्योंकि इस पौधे के गुणों के कारण मांसपेशियों में होने वाली कमजोरी दूरी होती है। परिणाम स्वरूप शारीरिक ऊर्जा बनी रहती है और थकान नहीं होती।
संपूर्ण टॉनिक के रूप में भी
आयुर्वेदाचार्य डा. मनोज देव के अनुसार यह पौध शरीर के लिए संपूर्ण टॉनिक का काम करता है। क्योंकि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए यह पित्त और वात दोषों को संतुलित करने में सक्षम है। विशेषरूप से इसके लिए इस पौधे से निर्मित औषधियों का प्रयोग होता है। पित्त और वात दोष दूर रहने से शरीर ताजा रहता है और मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है।
असंतुलित हार्मोन को करता है नियंत्रित
डा. मनोज देव के अनुसार सत्यानाशी के पौधे में बहुत ही अधिक औषधीय गुण हैं। यह असंतुलित हार्मोन को भी नियंत्रित करता है। विशेषकर पुरुषों में यौन शक्ति के लिए इसका प्रयोग बहुत ही चमत्कारी है। इसके अलावा मांसपेशियों को मजबूती के कारण शरीर को ताकत मिलती है।
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वर्तमान समय में और भी महत्वपूर्ण
डा. मनोज देव बताते हैं कि आज के समय में शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ लोगों को मानसिक स्वास्थ्य भी बिगड़ा रहता है। तरह तरह की चिंताएं रहती हैं और मानसिक थकान वाले कार्य अधिक होते हैं। ऐसे में सत्यनाशी के गुणों का लाभ लेना चाहिए। इसका प्रयोग किसी भी योग्य और सक्षम आयुर्वेदाचार्य के निर्देशों के अनुरूप ही करें।
ऐसे करें प्रयोग
डा. मनोज देव के अनुसार बेशक यह पौधा गुणों की खान है, लेकिन सेवन का तरीका और मात्रा बहुत महत्वपूर्ण है। सामान्यतौर पर सत्यानाशी के सेवन के लिए इसके तने से निकलने वाले तरल, पत्तियों और जड़ों का चूर्ण सुझाए जाते हैं। शहद, दूध या पानी के साथ इसका सेवन किया जा सकता है। महज 7 दिन में ही इसका प्रभाव दिखने लगता है, लेकिन बिना किसी योग्य आयुर्वेदाचार्य की सलाह के सेवन नहीं करें।

