Varsha Ritu Diet Ayurveda : वर्षा ऋतु में कमजोर होती है पाचन शक्तिवर्षा ऋतु में कमजोर होती है पाचन शक्ति

न्यू सीरिज न्यूज स्वास्थ्य डेस्क, दिल्ली 

 Varsha Ritu Diet Ayurveda :  बारिश का मौसम यानी वर्षा ऋतु शुरू हो चुका है। यह मौसम आहार श्रृंखला के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। आयुर्वेद के अनुसार वर्षा ऋतु में व्यक्ति के शरीर में पाचन शक्ति कमजोर होती है। ऐसे में आहार में जरूरत बदलाव बेहद महत्वपूर्ण होता है।

आयुर्वेद में साल भर के मौसम को 6 ऋतुओं में बांटा गया है। हर ऋतु के अनुसार आहार निर्धारित है, ताकि स्वास्थ्य सही रहे। क्योंकि हर मौसम में शरीर की क्रियाशीलता अलग होती है, ऐसे में आहार भी भिन्न रखा जाता है। आइए आज बात करते हैं वर्षा ऋतु में आहार की। क्योंकि इस मौसम में हवा में नमी बढ़ जाती है, ऐसे में कई प्रकार के खाने की वस्तुएं जल्दी खराब भी होने का खतरा रहता है।

Varsha Ritu Diet Ayurveda प्राचीन क्रिया

आयुर्वेद के अनुसार हर ऋतु का विशेष महत्व होता है। आयुर्वेद में इसको ऋतुचर्या के नाम से जाता जाता है। जींद में जानेमाने आयुर्वेदाचार्य डा. ओमप्रकाश के अनुसार यह पद्धति बहुत ही प्राचीन है। मौसम के अनुसार आहार की क्रिया को समझने से पहले ऋतुचर्या को समझना जरूरी है। यह दो शब्दों के मेल से बनी है। सबसे पहले इसमें ऋतु है। यानी ऋतु अर्थात मौसम के अनुसार चर्या या नियम, अनुशासन इसमें शामिल हैं।

शरीर के साथ मन पर भी पड़ता है प्रभाव

डा. ओमप्रकाश बताते हैं की मौसम यानी ऋतु के परिवर्तन का असर शरीर के साथ मन पर भी पड़ता है। यानी व्यक्ति का मन भी मौसम के अनुसार प्रभावित होता है। ऐसे में ऋतुचर्या के तहत हर मौसम के अनुसार जीवनशैली में आयुर्वेदिक आहार का महत्व बढ़ जाता है। क्योंकि खानपान शरीर को मौसमी के परिवर्तन के कारण जो बीमारियां होती हैं, उनसे लड़ने के लिए शक्ति देता है। इसके अनुसार मानसिक क्षमता भी विकसित होती है।

1 साल में 6 ऋतु

यूं तो सामान्यतौर पर हम साल भर में 4 ही मौसम की बात करते हैं, जिसमें गर्मी, सर्दी, वसंत और पतझड़ होती हैं, लेकिन आयुर्वेद में एक साल को 6 ऋतुओं में बांटा जाता है। क्योंकि 1 साल में 2 काल गर्मी और सर्दी होते हैं। हर काल में 3 ऋतुएं होती हैं। इस हिसाब से प्रत्येक ऋतु दो महीने तक चलती है। विशेषरूप से यह ऋतु प्रभाव भारतीय उपमहाद्वीप में ही प्रभावशाली होती हैं।

यह है ऋतुओं का विभाजन

भारतीय उपमहाद्वीप में मौसम के अनुसार आयुर्वेद में ऋतुओं का वर्णन है। इसमें प्रमुख है शिशिर यानी सर्दी ऋतु। इसका समय मध्य जनवरी से मध्य मार्च तक माना जाता है। इसके बाद मध्य मार्च से वसंत ऋतु मध्य मई तक चलती है। वहीं मध्य मई से मध्य जुलाई तक का समय ग्रीष्म ऋतु का होता है। यह एक काल में पूरी होती है।

दूसरा काल मध्य जुलाई से शुरू होता है। इसकी शुरूआत वर्षा ऋतु से होता है। जिसको सामान्य रूप में चौमासा कहा जाता है। इसका काल मध्य सितंबर तक होता है। क्योंकि मध्य सितंबर से शरद या पतझड़ ऋतु का समय हाेता है। मध्य सितंबर से मध्य नवंबर तक हेमंत ऋतु का होता है। मध्य नवंबर से मध्य जनवरी तक सर्द ऋतु होती है।

वर्षा ऋतु में होते हैं कई प्रकार के प्रभाव

डा. ओमप्रकाश के अनुसार वर्षा ऋतु में शरीर में कई प्रकार के बदलाव होते हैं। इसका समय जुलाई के मध्य से सितंबर के मध्य तक होता है। इस दौरान आसमान में बादल रहते हैं और बारिश चलती हैं। सभी जलाश्य जलमग्न होते हैं। वर्षा ऋतु में शरीर की शक्ति कम रहती है। साथ ही मौसमी प्रभाव के कारण वात दोष में परिवर्तन देखे जाते हैं। इसके अलावा पित्त दोष के जमाव के कारण शरीर की अग्नि प्रभावित रहती है।

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वर्षा मौसम में कैसा हो आहार

वर्षा ऋतु के दौरान हर किसी को ऐसे पदार्थों को सेवन करना चाहिए जो लवण और स्नेही गुणों से भरपूर हों। अनाज की बात की जाए तो गेहूं, चावल और पुराने जौ को प्राथमिकता दी जाती है। जो लोग मांसाहार करते हैं, वे सूप का प्रयोग कर सकते हैं। क्योंकि अन्य रूप में इसका प्रयोग पाचन में दिक्कत करता है। हालांकि आजकल पानी को साफ करने की कई तकनीक आ गई हैं, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार इस मौसम में उबला हुआ पानी पीने की सलाह दी जाती है। जो भी भोजन पचने में कठिन हो, उससे परहेज करें।

कैसी हो वर्षा ऋतु में जीवनशैली

वर्षा ऋतु के दौरान हवा में नमी की मात्रा बढ़ी रहती है। ऐसे में कई प्रकार के जीवाणु संक्रमण हो सकते हैं। ऐसे में ऐसी स्थिति से बचने के लिए शरीर पर तेल की मालिश करनी चाहिए। अपने कार्य के अनुसार नींद पूरी करें। यानी यदि दिन में लंबा कार्य समय है तो झपकी लेनी चाहिए। बारिश होने इसमें भीगना चाहिए। नियमित शारीरिक अभ्यास करें और यौन भोग से बचना चाहिए।

By Dharmbir Sharma

मैं धर्मबीर दैनिक जागरण में बतौर चीफ रिपोर्टर के तौर पर तीन साल तक सेवाएं दी। इससे पहले लगातार दस साल तक देश का प्रमुख समाचार पत्र अमर उजाला में चीफ रिपोर्टर के पद पर कार्यरत रहा। इससे पहले दैनिक भास्कर, दैनिक पंजाब केसरी, दैनिक आज समाज भी कई संस्थानों के साथ काम कर चुका हूं। 19 साल से पत्रकारिता कर रहा हूं। फिलहाल मेरा डिजिटल प्लेटफार्म हरियाणा डेयरी के नाम से फेसबुक, यूट्यूब चल रहा है।